40° के तापमान और इस गर्मी मे बाबा रामदेव जी का भक्त अनोखी तपसिया करते हुए,

 एक अनोखी आँखों देखी त्पसिया  राजस्थान ) 

हमारे आज की कहानी कोई इतिहास की कहनी नही है, यह आज वर्तमान की कहानी राजस्थान की है, राजस्थान मे त्याग और अनोखी भक्ति को इतिहास दोराता आया है, 

यह भक्त लोक देवता बाबा रामदेव जी का है इनका नाम (केवदा राम मेघवाल है जो एक अनोखी त्पसिया कर रहे है यह राजस्थान के जालोर जिले के रानिवाड़ा तहशील के रतन पुर गाव के है, , 
एनोने 12 वर्ष तक इसी प्रकार से त्पसिया करने का पर्न लिया हुआ है, यह पर्न 2018 मे लिया हुआ है, और इनके कुछ नियम भी है, सबसे पहला तो इनके त्पसिया करने का टाइम दोपार 12 बजे से 2 बजे तक का है और इसी टाइम सबसे ज्यादा गर्मी भी होती हैं, और यह 12 बजे कही पर भी सुकी मिठी मे एक गडा बनकर वो भी मरुधर मिठी मे फिर अपना पुरा शरीर एक हाथ सहित उस जमीन मे गाड़ देते है फिर अपनी गर्दन और अपना एक हाथ जमीन से बाहर रखते है, 
और यह अपना मुह और अपनी आँखे सूर्य की और ही रखते है और फिर बाबा रामदेव की त्पसिया करते है और यह अपने पैरो मे भी कभी चपल नही पहनते साय कितनी भी गर्मी कियो ना हो, यानी यह हमेसा नगे पाव सलते है, और पहनने के लिए भी यह शरीफ एक सोता वस्त्र रखते है ।, 

हाला की हमारे मीडिया वाले वाह पर गए थे, और वाह का नजारा देखकर शोक गए थे, क्योकि वाह 45० का तेज तापमान था और वाह की सुखी रेटेलि जमनी मे गुस कर केवदा राम जी भक्त तप्सिया कर रहे थे, हाला की मीडिया वालो ने बाबा से कुछ सवाल भी पुसे थे मगर उनोने ज्यादा जवाव नही दिया बस यह कहा था की वो लोक देवता बाबा रामदेव जी की आर्धना करते है, और वो 12 से 2 या 3 बजे तक फुल धूप मे त्पसिया करते हैऔर इसी प्रकार से त्पसिया करने का पर्न 12 वर्षा का लिया है। 

आज तक हिंदू धर्म को कोई समझ नही सका, और हिंदू धर्म मे दुनिया ऐसा ऐसा नजारा देखती है, की वो खुद विसार मे पड़ जाती हैं, और हमारे धर्म को भी इन मत्माओ ने बसा रखा है
और आज हमारे समाज मे ऐसे बुजरक बहुत कम देखने को मिलते है, आज हमारे भर्तियो ने अपने कर्म के पिसे आज अपना धर्म और मुगति का रास्ता भूल गए है, और ऐसे महा परुसो की वजह से हमारा धर्म बसा हुआ है, और यह केवदा राम जी उस जाती से है वो जाती आज भगवान को भी मानने इंकार कर रही हैं यह एक मेघवाल जाती के है, और आज हमे जातिवाद नही करना है , इन जातियों से हमारे आपस मे मद भेद होते है इस लिए हमको जातियों से उपर उठाकर मानव क्लियान के लिए कदम उढ़ाने चाहिए,। 


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