अजीब ओर गजीब लडाई ( 1644 ई का बिकानेर ओर नागोर रियासत का युद्ध जो शरीफ के तरबूजे के लिए हुआ था इसे राजस्थानी में ( मतीरे की राड भी कहां जाता है )👇
1644 ई में बिकानेर रियास्त की सीमा पर जखनिया गांव में एक किसान के खेत में तरबुजे का पौधा लगा हुआ था जब जब पोधा बड़ा हो गया तो वो है । नागोर रियासत में उसका कुस ऐसा फेल गया और नागोर की जमीन पर उस पौधे पर एक तरबूजा लगा।
मगर जब बीकानेर का किसान उस तरबुजे को लेने आया तो नागोर वाला किसान आकार तरबूज पर अपना हक जमाते हुए कहा यह तरबूजा मेरी जमीन पर है इसलिए इसका मालिक मे हु और यह मेरा है।
मगर बिकानेर वाला किसान उस तरबूज पर अपना हक जमता है कि इसका पोधा मेरी जमीन पर है ओर यह मेरी मेहनत है एसलिए यह मेरा है । अब दोनों किसान उस तरबुज पर अपना - अपना हक जमाते हुए विवाद कि ओर बढ गए विवाद विवाद कि चर्चा पुरे रियास्त मे फेल गई ओर एक दिन यह बात नागोर के दरबार में पहुस गई और नागोर के राजा अमर सिंह ने अपनी सेना को भीज दीया की तुम वो तरबूजा लाकर हमारे किसान को देदो वो हमारी जमीन पर है एसलिए वो हमारे किसान के हुआ।
अब यह बात बिकानेर के किसान को पता सलती है तो वो बीकानेर के दरबार में फरियाद लगाता है तो बीकानेर के राजा किरण सिंह नागोर के राजा पर करोधित होकर अपने किसान की हक के लिए अपनी सेना उस तरबूज को लेने भीजते है |
नागोर और बीकानेर की सेना आमने सामने हो जाती हैं हजारों तलवारे खेसी तानी जाती है।
दोनों सेना में भीषण युद्ध होता है ओर इस युद्ध में हजारों सैनिक मारे जाते हैं और बीकानेर सेना कि जीत गई और यह बीकानेर के किसान कि मेहनत थी और वो तरबुज बीकानेर कि जीत के बाद राजा किरण सिंह ने अपने किसान को देदिया।
( बाद में कहा गया मतिरे कि राण्ड हुई)
यह युद्ध हमे सिखाता है कि मुर्दा कीतना भी छोटा कियूना हैं मगर जब बात न्याय ओर सुवाभिमान कि हो तो खामूस नही रहना चाहिए।।

