भावुक करने वाले वीडियो और तस्वेरे जैन धर्म मे 11 वर्ष के बालक और माँ ने ली दीक्षा |

आज सोसल मीडिया पर जो तस्वीरे और वीडियो viral हो रहे है वो गुजरात के सूरत का है जनवरी 2024 मे सूरत मे जैन धर्म के सामूहिक दीक्षा समारोह आयोजित किया गया। जिसमे एक माँ ने 11 वर्ष के बेटे के साथ दीक्षा ली दीक्षा लेने वाले यह माँ और बेटे एक बड़े गराने के बताये जाते है, और यह एक बड़े बिजनेस की पत्नी और बेट था आज जो लोग इनके वीडियो देखते हैं वो जयदा तर भावुक हो रहे है, हम वीडियो देखते हैं तो उनमे माँ और बेटा खुश भी नजर आ रहे है मगर यह कितने मजबूत होंगे की एक बेटा अपनी माँ से आखिर बार मिल रहा है और एक माँ अपने बेटे से आखिर बार मिल रही हैं, 

दीक्षा लेने का किया कारण है। 

इनके दीक्षा लेने का कारण तो कोई समझ मे नही आया है और नही कोई ऐसे कोई वजह मिले जिससे इनको दीक्षा लेने पड़ी मगर एक बात कह जा रही हैं की इस महिला ने दीक्षा लेने का पर्ण जब गर्भवती थी तब लिया था और होसकता है की इसी लिए उनोने अपने बेटे के साथ दीक्षा ली हो। 

और इस महिला की उम्र 30 साल बताये जा रही हैं और इनका नाम स्वीटी जी था और दीक्षा के बाद इनका नाम भाव शुद्धि श्री जी हो गया और जो 11 साल का इनका बच्चा था उनका नाम हर्दीन था और दीक्षा के बाद इनका नाम हितेसी रतन्विजय कनाम रखा गया और एनोने लाखों करोडो रुपए दान देकर यह दीक्षा ली है। 

दीक्षा लेने के बाद माँ और बेटे का रास्ता अलग अलग हो गया। 

कुछ लोग चोचते है की यह माँ और बेटा दीक्षा लेने के बाद भी एक साथ रह सकते है या फिर एक दूसरे से बात कर सकते है मगर ऐसा बीलकुल नही होता,, अभी 11 वर्ष के बेटे के साथ जिस माँ ने दीक्षा ली है वो अपने बेटे के साथ ना तो रह पायगी और नही अपने बेटे को छ भी नही सकती और नही बेटा माँ को छ सकता बड़ी कठोर जैन दीक्षा होती हैं अब माँ बेटे का कोई रिस्ता नही रा यानी अपने संपूर्ण भूत काल को भूलना पड़ता है और फिर एक भिखारी की तरह रहना होता है भी

जैसे नगे पाव सलना और अपने पास फोन गड़ी जैसे सीजे भी अपने पास नही रखते और इनको बस मांग कर ही खाना खाना पड़ता है और यह अपने हाथ से अग्नि भी नही जला सकते और यह जिस घर मे भिक्षा लेने जाते है उस घर मे पहले से कोई संदेश वाग्रा नही भेजते और यह अपने जीवन मे पैसों को कभी हाथ नही लगाते और यह एक घर से कभी ज्यादा खाना नही लेते यानी यह जिस घर से भिक्षा लेते है उस घर मे बने हुए खाने मे से ही लेते है और उतनी भिक्षा लेते है की उस परिवार को फिर से खाना बनाने की जरूरत ना पड़े इसी प्रकार थोड़ा - थोड़ा हर घर से खाना लेते है और अपना पेट भरते हैं, और यह अपने जीवन मे कभी भी झूठ नही बोलते इनके कई कठोर नियम होते है, 

किया यह 11 वर्ष के बच्चे  के साथ  गलत हुआ है 


साथियों सनियास लेना अपनी अपनी पसन्द होती हैं और सभी धर्मो का समान करना चाहिए, और सनियास और दीक्षा लेना मोक्स का रास्ता होता है जो बड़ा पवित्र होता है, जो हमारे धर्म की सान होता है, मगर हमे अपने धर्म का समान करते होए हमको दीक्षा के लिए सनियास लेने की उम्र को 18 वर्ष करनी चाहिए क्योकि जब हम छोटे बच्चो को दीक्षा देते है या फिर सनियास के लिए विदा करते है तो वो बच्चे होते है जो दीक्षा लेने के बाद कैसा जीवन जीना पड़ता है उसका उनको कोई अनुभव नही होता है, इसिलिए दीक्षा की उम्र 18 वर्ष करनी चाहिए ताकि लोग अपनी पुन ईशा से दीक्षा ले सके और अपने अनुभव से काम कर सके तो दोस्तो आज का लेख यहाँ पर समाप्त होता है

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