मेवाड़ का पितामह भीष्म, mewad ka bhishma pitamah , mevad ke rakkumar chuda kar itihaas,


  
मेवाड के इतिहास में बहुत अनोखी बात है 
 यह बात है 1380 ई की जब मेवाड रियासत पर शासन था महाराणा लाखा का था तो उनके शासन काल में मेवाड ओर मारवाड़ की बनती नही थी विवाद ओर जगड़े होते रहते थे तो मारवाड़ के राजा राठोड़ चुदावत जी ने मारवाड़ ओर मेवाड के विवाद को खत्म कर  एक रिश्ते से जुड़ना चाहा 
• राठोड चुंडावत जी ने अपनी पुत्री हंसा बाई का विवाह मेवाड के कुंवर चुंडा के साथ करना चाहा ओर वो अपनी पुत्री का विवाह का नारिल अपने पुत्र जगमाल को देकर मारवाड़ से मेवाड भिज देते है राजकुमार जगमाल मेवाड के दरबार में जाकर वो विवाह का नारियल गलती से महाराणा लाखा को देते है राणा लाखा नारियल को अपने हाथो में लेकर कहते हैं की अब मेवाड ओर मारवाड़ एक हो जाएंगे ओर राठोड जगमाल खुश होकर मारवाड़ आ जाते हैं 
• महाराणा लाखा जब नारिल के साथ आया पत्र पढ़ते है तो वो आसरीय सिक्त हो जाते है उस पत्र में कुंवर चूड़ा हंसा बाई के विवाह के बारे मे लिखा हुआ था राणा लाखा अपने पुत्र चूड़ा को जल्दी बुलाकर वो नारिल लेनेको कहते है ओर विवाह का प्रस्ताव स्वीकार करने को कहते हैं पर विवाह का नारियल जिसके हाथो में दीया जता है उसीको विवाह करना पड़ता था यह एक परम्परा थी 
• कुंवर चूड़ा अपने पिता को कहते है की यह नारियल भले ही मेरे लिऐ था पर यह आपके हाथो में आपको दीया है इसी लिए यह विवाह आपको करना पड़ेगा यह ही हमारी परम्परा रही है वो अपनी जिद पर अटके रहे इसी कारण राणा मोकल को विवाह के यह हा करनी पड़ी
• माहाराणा लाखा की बारात मेवाड से रवाना होती है हाथी ओर हजारों घोड़ों के साथ बारात मारवाड़ पहुस्ती हैं जब राठोड़ चुंडावत जी को पता सालता है की कुंवर चूड़ा की जगह इनके पिता राणा लाखा आए हैं तो राठोडो ने विवाह से इंकार कर लिया अभी बीना सादी के बारात वापस ले जाना भी मेवाड के लिए सरमिंदे की बात थी 
 

• तभी कुंवर चूड़ा राठोड़ चुंडावत जी को बात को बहुत समझाने की कुसित करते हैं पर राठोड़ एक बात पर विवाह के लिए हा कर देते है की बाद में हंसा कवर ओर राणा लाखा से जो पुत्र जन्म लेगा आप उसको मेवाड का राजा बनाने का वसन दो तो यह विवाह हो सकता है तभी मेवाड ओर अपने पिता के समान के लिए राजकूमार चूड़ा यह प्रतिज्ञा लेते हैं की वो आ जीवन काल मेवाड के संग रक्षक बन कर रहिगे ओर मेवाड की गद्दी पर जो उनके पिता राणा लाखा से पुत्र उत्पन होगा उसको मेवाड का राजा बनाएगी फिर 15 साल बाद जब राणा लाखा की मृत्यु हो गई तभी हंसा बाई के पुत्र और अपने छोटे भाई राणा मोखल को मेवाड का राजा बनाते हैं ओर यह कुंवर चुंडा का त्याग मेवाड के इतिहास में रह गया और बाद में उनके वंशज सुंडावत कहलाए जो मेवाड के रणाओ के सगे है 

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