राणा प्रताप सिंह का बहादुर हाथी रामप्रसाद हिस्ट्री
1) महाराणा प्रताप का एक घोड़ा था चेतक जिसके बारे में सब जानते है जो एक सालक ओर चतुर घोड़ा था मगर राणा प्रताप का एक हाथी था जिसका नाम था रामप्रसाद वो भी चेतक की तरह समझदार और बहदुर था
2) जब हल्दी घाटी का युद्ध हुआ तब युद्ध में रामप्रसाद ने अकबर के बाराह हाथियों को मार गिराया था हल्दीघाटी के मैदानों में रामप्रसाद दिन भर कई मुगलिय सैनिकों को अपने पैरो तले कुशलता फिरता था अकबर के सैनिक इस हाथी को देखकर अपनी - अपनी जान बचाने के लिऐ उधर इधर भाग जाते
3) आखिर कार अकबर अपने सेना की बुरी हालत देख कर उस हाथी को बन्दी बनाने के लिऐ 16 मवतो का एक जुंड बनाया ओर रामप्रसद को बन्दी बनाकर अकबर के सामने मुगलिया खीमे में ले गए
4) हाथी रामप्रसाद को सोने की जंजीरों में बांध रखा और अकबर ने रामप्रसाद का नाम बदल कर पिरप्रसाद कर दिया ओर अकबर सहता था की हाथी को वो मुगलिया फोज में रखिगे तो उसने उस हाथी को अपनी ओर करने के लिए रामप्रसाद हाथी के सामने कई मीठे फल, ओर गने का जूस रखा पर रामप्रसाद अपने मालिक महाराणा प्रताप के परति इतना प्रीम था की वो हाथी बीना कुस खाए पिए 18 दिनों तक भूखा रह गया पर अकबर का एक दाना तक नही खाया 18 वे दीन रामप्रसाद का सर्वगास हो गया ।
तभी अकबर ने कहा था की में जिसके हाथी को नही जुका सका तो राणा प्रताप को किया जुकाउगा ।
