हल्दी बाई भील वो एक विरागना नारी है जिसके नाम पर 1576 ई में महाराणा प्रताप सिंह और अकबर के बीच हुई युद्ध का नाम हल्दी घाटी रखा
:- यह बात 1576 ई की है उस टाइम दिल्ली का बादशाह अकबर ओर मेवाड़ के राजा राणा प्रताप सिंह के बिच सलते संघर्ष के कारण अकबर दिल्ली से एक विशाल सेना को लेकर मेवाड़ की तरफ बढ गया
• अब राणा प्रताप सिंह भी युद्ध करने की तैयारिया में लग गय महाराणा प्रताप अपने कई सरदार ओर भील समाज का सरदार राणा पूजा के साथ अकबर से लड़ने की रण निति बना रहे थे
•इस टाइम मेवाड़ के पहाड़ी और घाटियों वाले क्षेत्र जहां मेवाड़ ओर दूसरे राज्यों की सीमा लगती थी वहा भील सैनिक तैनात किए हुए थे जो सरदर राणा पुजा के अंडर में थे अब अकबर अपनी फोज के साथ सीधा उदयपुर आना चाहता था मगर उनके सामने अरावली की बड़ी - बड़ी पहाड़िया और घटिया थीं कोई सीधा मार्ग नही था इसलिए अकबर मेवाड़ की सीमा से 2 कोस दूर अपनी सावनी लगाता है
• फिर अकबर 2 हजार सेनीको को पहाड़ी से इलाके में घुसाया ताकि पता सल सके की यहां रास्ता केसा है और कोई खतरा तो नही हैं और उसी पहाड़ी सीमा की रक्षा राणा पुजा की सेनानी हल्दी बाई भील अपने भील सैनिकों के साथ कर रहि थी
• की अगर हम मौत से डरकर पीसे हटीगे तो हमे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा एक सैनिक को राणा जी के पास संदेसा लेकर भीज दिया और हल्दी बाई भील गोरिला युद्ध नीति अपना कर 2 हजार की मुगल फोज पर हमला करती हैं मुगलों को पहाड़ी इलाके में कुस समझ नही आ रहा था की हमला किस ओर से हो राहा हल्दी बाई के सारे सैनिक बहादुरी के साथ लडते हुई और दुसमन को मरते हुई वीर गीती प्राप्त कर रहे थे हल्दी बाई भील जिसने 2 हजार की फोज को उस पहाड़ी में ही समको समाप्त कर दिया मगर बड़ी जख्मी होने के करण वीर गति को प्राप्त हो सुकी थीं
• महाराणा प्रताप अपनी सेना के साथ वहा आते हैं तो वहा का मंजर देखकर हल्दी बाई को बहादुरी देखकर खुश हुईं पर उनकी आखों में नमी आ गई की हल्दी बाई वीर गति को प्राप्त हो गई
• महाराणा प्रताप सिंह ने सरदार पुजा को कहा की हल्दी बाई आज अमर हो गई है वो तो इस दुनियां में नही है पर उसका नाम हमेशा इस दुनियां में रहिगा हम इस महा युद्ध का नाम हल्दी घाटी रखीगे ओर फिर इस युद्ध का नाम पड़ा हल्दी घाटी
====X नमन है इसी वीर नारी को X====

