मेवाड़ का सबसे त्यागी राजकुमार जिसने नेया इतिहास लिखा राजकुमार चुंडावत
• 1395 ई में मेवाड़ के राजा महाराणा लाखा थे महाराणा लाखा के ज्येष्ठ पुत्र कुंवर चूड़ा थे कुंवर चूड़ा बस्पन से ही जन सेवा ओर धर्म पर सलने वाले राजकुमार थे मेवाड़ की परजा भी उनको भव्षीय में राजा के रूप में देखना चाहती प्रजा के मंचा देखकर राणा लाखा चूड़ा को युवराज बना दिया
• उन दिनों मेवाड़ ओर मारवाड़ के रिसते कुस अच्छे नही थे तो मारवाड़ के राजा राठौड़ चुंडावत जी ने आपसी भीत को खत्म करने के लिए अपनी पुत्री हंसा बाई का विवाह राजकुमार चूड़ा से करना सहा इसलिए विवाह का प्रस्ताव यानी नारियल देकर अपने पुत्र कुंवर जगमाल को मेवाड़ भिजा
• जगमाल राठौड़ मेवाड़ पहुस्ता है वहा मेवाड़ के राजदरबार में जाता है जहा सिसौदिया सरदारों की सभा लगी हुई थी उस दीन सभा में राजकुमार चूड़ा उपसिथ्त नही थे तो जगमाल राठौड ने विवाह का नारियल महाराणा लाखा को देदिया उवराज चूड़ा समझकर और बारात कब लेके आना है इन सब का एक पत्र लिखा हुआ था वो देडिया ओर वापस मारवाड़ आ गए
• अब राणा लाखा नारियल के साथ आए पत्र को खोलकर पढ़ते है तो वो खुद सोक जाते है कियोकी उसमे नाम इनके पुत्र चूड़ा का लिखा हुआ था अब राणा लाखा सब कुस समझ सुके थे इसलिए उनोने अपने पुत्र चूड़ा को कक्ष में बुलाया जैसे चुंडा अपने पिता राणा लाखा के पास आते हैं तो राणा लाख सारे बात समझा देते है और हंसा बाई से विवाह करने का आदेश देते हैं मगर चुंडा मानने को तैयार नहीं था चूड़ा ने कहा कि पिताजी नारियल आपको दिया और आपने लिया इसीलिए हंसा बाई के साथ आपको ही विवाह करना पड़िगा चूड़ा अपने धर्म ओर जिद पर अटका आखिरकार राणा लाखा को विवाह के लिए हा करनी पड़ी
• अब राणा लाखा की बारात खुद राजकुमार चूड़ा तैयार करते है सारे सिसोदिया सरदार राणा लाखा हाथी पर सज धज कर बैठकर मेवाड़ से मारवाड़ की ओर रवाना हुए जैसे जोधपुर पहुस्ते है तो राठौड़ चुंडावत जी राणा लाख को दुहले के रूप में देखकर सोक गए
• अब राठौड़ सरदारों ने हंसा बाई का राजकुमार चूड़ा की जगह पर उनके पिता राणा लाखा से विवाह कराने से इंकार कर दिया अब अगर राणा लाखा की बारात वापस मेवाड़ आती तो मेवाड़ का सर जूक जाता ओर मारवाड़ और मेवाड़ के बीच में भीसन युद्ध होता मगर तभी राजकुमार चूड़ा हंसा बाई के पिता राठोड़ चुडावत जी के पास पहुंच ता है और कहता है की इसमें आपके पुत्र जगमाल की भी गलती है जो नारियाल मुझे देना था वो मेरे पिता को देदियां अगर अब यह विवाह नही हुआ तो दोनो पक्षों का नाक कट जाएगा, फिर हंसा बाई को पूसा तो उनोहने विवाह के लिए हा कर दी
• मगर राठोड़ चुडावत जी ने कई सिसौदिया सरदारों की मोजूदी में राजकुमार चूड़ा को वासनो में लेलिया, की अब मेवाड़ का नैया राजा हंसा बाई ओर राणा लाखा का ही पुत्र अगला मेवाड़ का राजा बनेगा और राजकुमार चूड़ा ने भी यह सफत लेली की में आजीवन मेवाड़ का सगरक्षक बन कर रहुगा फिर वहा पर विवाह हुआ 5 साल बाद हंसा बाई एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम राणा मोखल दिया जाता है और राजकुमार चूड़ा ने अपनी सफत के अनुसार कुंवर मोखल को मेवाड़ का राणा बना दिया
• राजकुमार चुंडा के वंशज चुंडावत कहलाए और याह से सिसोदियो की दो साखाय सरू होती है ।।।।

