दुनिया की सबसे शक्तिशाली तलवार सिरोही की तलवार
• सिरोही की तलवार आज इतिहास की ताकतवर तलवार और सबसे शक्तिशाली मानी जाती है जिसने कई सुलतानों की गर्दने काट दी और इतिहास में एक मजबूत और शक्तिशाली तलवार का दर्जा दिया गया अब बात आती है सिरोही की तलवार के साथ देवड़ा चोहानो ओर दिल्ली के मुगलो के युद्ध की जहा सिरोही की तलवार पहली बार समकी थी • 1583 ई अब सिरोही पर देवड़ा शासक सुरतान सिंह चौहान का था जो महाराणा प्रताप सिंह के प्रिय मित्र भी थे जब 18 जून 1576 ई में मुगल बादशाह अकबर ओर मेवाड़ के राजा महाराणा प्रताप सिंह के बिस हल्दी गाटी का इतिहासिक युद्ध हुआ उस युद्ध मे सुरतान सिंह ने महाराणा प्रताप की मदत ओर सयोग किया अब हल्दीगटी का युद्ध समाप्त हो सुका था
• मगर अब अकबर जो सुरतान सिंह से नाराज था ओर अकबर ने मुगलों की आधींता स्विकार करने के लिए सिरोही एक पत्र भिजा मगर सुरतान सिंह ने साफ़ मना कर दिया की वो मुगलों की अधीनता कभी भी स्विकार नही करेगे
•सुरतान सिंह दुवारा मना करने से अकबर अब युद्ध की तैयारी में जुट गया अपनी एक विशाल टुकड़ी तैयार की ओर अकबर ने उस फोज का सेनापति प्रधान सेनापति महाराणा उदय सिंह के पुत्र जगमाल को बनाया और सिरोही की तरफ रवाना कर दिया
• जैसे हि सुरतान सिंह को पता सला की मुगल फोज का सेनापति जगमाल सिंह है तो युद्ध के नगारे बजाए गए की आज हमारे दुसमन की सेना लेकर देस का गरधार आ रहा है ना मुग़ल बस कर जाएंगे ना जगमाल जिंदा जा पाएगा
•सुरतान सिंह अब फोज में जोस भरकर सिरोही की तलवार लेकर दुर्ग से निकल पड़े मुगल फोज ओर देवड़ो की फोज आमने सामने होती है दतानी नामक गांव में
• 17 अक्टूबर 1583 का वो खोपनाक दातानी युद्ध जिसने सिरोही की तलवार और सूरतान सिंह ने मुग्लो को भगा भगा कर मारा या तक की जगमाल सिंह भी सुरतान सिंह के हाटो मारा जाता हैं कुस बस्से कस्से मुग़ल सैनिक वापस भाग जाते हैं
• दातनी के युद्ध में सिरोही की तलवार सूरतान सिंह अमर हो गए
• अकबर ने अपनी इस हार ओर सेनीय नुकसान के कारण अपने जीवन में कभी सिरोही की तरफ आंख उठाकर नही देखा


